➤ अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव भगवान रघुनाथ की रथयात्रा के साथ शुरू
➤ करीब 300 से ज्यादा देवी-देवताओं की उपस्थिति से ढालपुर मैदान देवमयी
➤ राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल बने साक्षी, हजारों लोगों ने देखा दिव्य नजारा
कुल्लू। आपदा के 24 दिन बाद आखिरकार पूरे भव्यता और परंपरा के साथ अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव का आगाज हो गया है। गुरुवार शाम को भगवान रघुनाथ की भव्य रथयात्रा के साथ ऐतिहासिक ढालपुर मैदान में देवताओं का यह महाकुंभ शुरू हुआ। इस दिव्य क्षण के साक्षी हजारों श्रद्धालु बने, वहीं राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने स्वयं उपस्थित होकर भगवान रघुनाथ के अस्थायी शिविर में जाकर आशीर्वाद लिया।
रथयात्रा के दौरान करीब 100 देवी-देवता मैदान में मौजूद रहे और धीरे-धीरे यह संख्या 300 से अधिक हो गई। बुधवार शाम तक 200 से ज्यादा देवता ढालपुर पहुंच चुके थे और इस बार 332 देवी-देवताओं को न्योता भेजा गया था। आनी-निरमंड क्षेत्र से आए देवता 150 से 200 किलोमीटर की कठिन यात्रा कर उत्सव में शामिल हुए। वहीं, माता हिडिंबा भी अपने पूरे लाव-लश्कर के साथ रामशिला और बिजली महादेव होते हुए सुल्तानपुर पहुंचीं।
इस भव्य आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि पूरा ढालपुर देवलोक में तब्दील हो गया। देवताओं के साथ आए देवलू नाचते-गाते हुए पहुंचे और उनका संगम घाटी को आस्था और परंपरा के अद्भुत रंग में रंग गया। दिव्य देव मिलन इस बार भी आकर्षण का केंद्र बना, जहां परंपरा, आस्था और संस्कृति एक साथ जीवंत होती दिखी।
गौरतलब है कि भगवान रघुनाथ के सम्मान में यह दशहरा पर्व 365 वर्षों से यानी 1660 ईस्वी से लगातार मनाया जा रहा है। यह सिर्फ एक उत्सव नहीं बल्कि देवताओं का सबसे बड़ा महापर्व है, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से लोग कुल्लू पहुंचते हैं।



